"ठक ठक" शायद दरवाजे पर कोई था, सोमवार का दिन था तो पापा भी घर ही थे, कबीर देखो दरवाजे पर कोई है पापा ने आवाज़ लगाई। मैने दरवाजा खोला बाहर सूट पहने एक आदमी खड़ा था, मैने पूछा जी बोलिए क्या बात है। उसने पापा का नाम लेकर पूछा क्या ये उन्हीं का घर है मैने कहा हां में अभी बुलाता हूं। पापा कोई आपसे मिलने आया है मैने पापा को बुलाया और खुद अंदर चला गया। मैने अभी अपनी किताब उठाई ही थी कि पापा उस सूट वाले व्यक्ति के साथ अंदर आ गए और मुझे इशारा करते हुए कुर्सियों को साफ करने को कहा और उस व्यक्ति को बैठने के लिए आमंत्रित किया। पापा के चेहरे पर मुस्कान को देख कर में भी वहीं बैठ गया कुछ देर तक तो कुछ समझ नहीं आया फिर पता चला कि ये सूट वाला व्यक्ति किसी "होम लोन" कंपनी का अधिकारी है। कुछ समय पहले पापा ने "होम लोन" लेने के लिए घर में मशवरा लिया था और कहा था कि बहुत जल्द हम खुद के घर में रहने लगेंगे, उस दिन हम सब बहुत खुश थे। शायद वो दिन दूर नहीं जब हम खुद के घर में रहने लगेंगे कितना सुकून मिलेगा ना किसी तरह का कोई किराया देना होगा नाही किसी की सुन्नी पड़ेगी में ये सोच ही रहा था कि पापा ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए बोला बेटा मैने जिस घर की बात की थी अगले महीने से हम उसी में रहेंगे, ये सुन कर खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। बचपन से आज तक यही तो मेरा सपना था कि हम अपना घर लेंगे आज वो सपना हकीक़त में बदल जाएगा। पापा डक्यूमंट्स पर साइन कर रहें थे कि पैन चलते चलते रुक गया। मैने जैसे ही पास में रखे पैन को उठाने के लिए हाथ बढ़ाया सिरहाने रखा पानी का जग ज़मीन पर गिर गया उसकी आवाज़ से मेरी आंख खुल गई। मैं सपना देख रहा था जो की बहुत ही खूबसूरत था मेरी निगाह दीवार पर टंगी घड़ी पर गई रात के 3:45 बज रहे थे। काश कि सुबह के 5 बज रहे होते, क्यों की अक्सर मैने बुज़ुर्ग लोगो से सुना था कि सुबह 5 बजे के सपने सच हो जाते है।
#सपना
#सब_का_सपना_घर_हो_अपना
#वाजिद✍️
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