सरकार के अनेक प्रयासो के बाद भी आज देश मे लोग भूख और कुपोषण की समस्या से लड़ रहे है। 2017 में इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा जारी वैश्विक भूख सूचकांक में दुनिया के 119 विकासशील देशो में भारत का स्थान 100 था जो कि 2016 में 97 था इससे पता चलता है की देश में भूख और कुपोषण को लेकर हालात सुधरने के बजाए बिगड़े है। भारत में कुपोषण और खाद्य सुरक्षा को लेकर कई योजनाएं चलाई जाती रही हैं लेकिन समस्या की विकरालता को देखते हुए इतना सब कुछ कम तो नहीं था साथ ही व्यवस्थागत विसंगतियों और भ्रष्टाचार की वजह से भी ये लगभग बेअसर साबित हुई। अभी भी देश के राज्यो में लगभग 43 लाख बच्चे कुपोषित है जबकि करीब 10 लाख बच्चे तो अतिकुपोषित यानी मौत की दहलीज पर है जिसका मतलब है कि यदि समय रहते इनके स्वास्थ्य पर ध्यान नही दिया गया तो यह जल्दी ही दम तोड़ देंगे। भारत सरकार को एक नजर इन कुपोषण से पीड़ितों की ओर भी देखना अतिआवश्यक है सिर्फ दिलहासा देने से कुछ नही होगा।
Sunday, 28 April 2019
Thursday, 25 April 2019
बाल मजदूरी के खिलाफ
बाल मजदूरी भारत देश के लिए एक निराशाजनक तस्वीर है क्योंकि जिस देश मे "सबका साथ सबका विकास" जैसे श्लोकों से लोगों को प्रभावित किया जाता हैं उनको दिलहासा दिया जाता है। उसी देश में एक ऐसा समाज भी है जो बच्चों को पढ़ने लिखने उनके भविष्य को बेहतर बनाने कि जगह उन्हें आग कि भट्टियों में झोंक देते है जिस उमर में बच्चों के नरम होने चाहिए उनके हाथ आग से जले हुए है उन मासूम बच्चों का भविष्य उस आग की लपटों में ही जल कर राख बन जाता है। ऐसी मानसिकता वाले समाज को जल्द से जल्द नष्ट करने की आवश्यकता है जिस देश को पूरे विश्व से प्रोत्साहन मिल रहा है उसके विकास की नीतियों के लिये उसी देश के लिए बाल मजदूरी एक कलंक है। संविधान में भी इस पर प्रतिबंध है इसके लिए भारत सरकार ने कई योजनाएं भी चलाई पर फिर भी इस पर पूर्ण रूप से रोक लगाने में असमर्थ रहे। भारत सरकार को इस विषय को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है जिससे किसी भी बच्चे का भविष्य आग की भट्टी में राख ना हो।
बेटियों को सशक्त बनाओ
पिछले कई दशको से देश की बेटियों का शिक्षा का स्तर काफी हद तक बढ़ा है जो कि बहुत ही गर्व की बात है।लेकिन वहीं एक तरफ देश की बेटियों के साथ दुव्र्यवहार की वारदातों मे भी वृद्धि हुई है। "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" जैसे श्लोक से बेटियां पढ़ तो रही है लेकिन वह खुद को बचाने मे असमर्थ रह जाती है जिसका फायदा वह लोग उठा रहे है जो बेटियों के साथ दुव्र्यवहार करते है । इसलिए देश की बेटियों को दुव्र्यवहार से बचाने के लिए शिक्षा के साथ साथ उन्हें सशक्त बनाने की भी आवश्यकता है। जिससे वह अपने साथ हो रहे दुव्र्यवहार का विरोध कर सकें खुद की रक्षा कर सकें। देश की बेटियों का सशक्त होना उनके शिक्षित होने से भी ज्यादा आवश्यक है क्योंकि शिक्षा से वह शिक्षित और कुशल तो हो सकती हैं परंतु किसी भी समस्या से लड़ने के लिए उनका सशक्त होना अति आवश्यक हैं। इसलिए बेटियों को सशक्त बनाओ।
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