Saturday, 4 July 2020

गुलाम_पंछी

की अभी जी भरकर उड़ान भरी भी नहीं थी और मालिक का इशारा पाकर फिर से अपने अरमान अपने पंखों में समेट के हर रोज़ की तरह आज भी पिंजरे की ओर वापस लौटने लगे मानो जैसे गुलाम हो किसी के, ये खुला आसमान इन्हीं के लिए तो है यही तो इसकी खूबसूरती को निखारते है पर फिर भी ये अपनी कोशिश में नाकाम नजर आते है दोष इनका नहीं कहीं ना कहीं हमारी सोच का है और फिर कहे तो कहे किससे इनकी बेबसी पर तरस हमें खुद नहीं आता।

#लिखने_की_एक_छोटी_सी_कोशिश

#वाजिद✍️

रात_के 3:45



"ठक ठक" शायद दरवाजे पर कोई था,  सोमवार का दिन था तो पापा भी घर ही थे, कबीर देखो दरवाजे पर कोई है पापा ने आवाज़ लगाई। मैने दरवाजा खोला बाहर  सूट पहने एक आदमी  खड़ा था, मैने पूछा जी बोलिए क्या बात है। उसने पापा का नाम लेकर पूछा क्या ये उन्हीं का घर है मैने कहा हां में अभी बुलाता हूं। पापा कोई आपसे मिलने आया है मैने पापा को बुलाया और खुद अंदर चला गया। मैने अभी अपनी किताब उठाई ही थी कि पापा उस सूट वाले व्यक्ति के साथ अंदर आ गए और मुझे इशारा करते हुए कुर्सियों को साफ करने को कहा और उस व्यक्ति को बैठने के लिए आमंत्रित किया। पापा के चेहरे पर  मुस्कान को देख कर में भी वहीं बैठ गया  कुछ देर तक तो कुछ समझ नहीं आया फिर पता चला कि ये सूट वाला व्यक्ति किसी "होम लोन" कंपनी का अधिकारी है। कुछ समय पहले पापा ने "होम लोन"  लेने के लिए घर में मशवरा लिया था और कहा था कि बहुत जल्द हम खुद के घर में रहने लगेंगे, उस दिन हम सब बहुत खुश थे। शायद वो दिन दूर नहीं जब हम खुद के घर में रहने लगेंगे कितना सुकून मिलेगा ना किसी तरह का कोई किराया देना होगा नाही किसी की सुन्नी पड़ेगी में ये सोच ही रहा था कि पापा ने मेरे कंधे पर हाथ रखते  हुए बोला बेटा मैने जिस घर की  बात की थी अगले  महीने से हम उसी में रहेंगे, ये सुन कर खुशी  का कोई ठिकाना नहीं था। बचपन से आज तक यही तो मेरा सपना था कि हम अपना घर लेंगे आज वो सपना हकीक़त में बदल जाएगा। पापा डक्यूमंट्स पर साइन कर रहें थे कि पैन चलते चलते रुक गया। मैने जैसे ही पास में रखे पैन को उठाने के लिए हाथ बढ़ाया सिरहाने रखा पानी का जग ज़मीन पर गिर गया उसकी आवाज़ से मेरी आंख खुल गई। मैं सपना देख रहा था जो की बहुत ही  खूबसूरत था मेरी निगाह दीवार पर टंगी घड़ी पर गई रात के 3:45 बज रहे थे। काश कि सुबह के 5 बज रहे होते, क्यों की अक्सर मैने बुज़ुर्ग लोगो से सुना था कि सुबह 5 बजे के सपने सच हो जाते है।

#सपना

#सब_का_सपना_घर_हो_अपना

#वाजिद✍️

असद की पोस्ट

मैं फेसबुक स्क्रोल कर रहा था तभी एक नोटिफिकेशन आया मैने नोटिफिकेशन के बैल आइकन पर क्लिक किया "असद एड ए न्यू पोस्ट" असद की पोस्ट,जरूर आज फिर कुछ तीखा लिखा होगा। असद मेरा बहुत अज़ीज़ दोस्त है, हिंदी पत्रकारिता का छात्र और चीजो को बड़ी ही बारीकी से पढ़ने लिखने का शौक रखता है। अभी से ही खुद को पत्रकार समझता है समझे भी क्यों ना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का हिस्सा जो ठहरा परन्तु आज कल के माहौल को देखते हुए मुझे उसकी फिकर रहती है कहीं उसके साथ कोई अनहोनी ना हो जाए क्यूंकि वो आए दिन देश में बढ़ते इस्लामोफोबिया, कश्मीर में मुस्लिमो के साथ  हो रही बर्बरता, हिन्दू - मुस्लिम प्रोपोगंडा पर   सरकार की आलोचना करता है उसकी गलत नीतियों पर सवाल करता है जबकि मैन स्ट्रीम मीडिया सरकार के इतने पक्ष में है कि  भारतीय सैनिकों पर हुए चीनी हमले का जिम्मेदार भी भारतीय सैना को ही ठहरा दिया। खैर मैंने पोस्ट पर क्लिक किया "ब्राह्मण आतंकवादी क्यों नहीं ?" पोस्ट का शीर्षक पढ़ते ही मुझे बहुत अजीब लगा मैंने उसे तुरंत कॉल करना चाहा पर उसका फोन स्विच ऑफ था चलो बाद में कॉल करूंगा, फिलहाल पोस्ट पढ़ता हूं कि उसने  ऐसा शीर्षक क्यों लिखा है। मैंने पोस्ट पढ़ना शुरू किया "कल उत्तर प्रदेश के कानपुर में एनकाउंटर करने गए आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए जिसमें  विकास दुबे नाम के बदमाश का नाम सामने आ रहा है, बताया जा रहा है कि विकास दुबे बहुत बड़ा क्रिमिनल है इसके खिलाफ कई सारे कैस भी दर्ज है इस सबके बावजूद भी ट्विटर पर मैंने देखा कि एक महिला का फेसबुक पोस्ट वायरल हो रहा है। महिला का नाम रीता पांडेय है जिसने अपनी फेसबुक वॉल पर "ब्राह्मण शेर विकास दुबे ज़िंदाबाद" लिख कर पोस्ट किया और इसके बाद कॉमेंट्स में कई सारे लोग ज़िंदाबाद, विकास दुबे ज़िंदाबाद, ब्राह्मण शेर जैसे कॉमेंट्स करने लगे। पहला सवाल तो यह है कि रक्षकों को मारने वाला शेर कैसे हो सकता ? वो भी जब खुद एक क्रिमिनल है, दूसरा सवाल यह की स्ट्रीम मीडिया ने इस फेसबुक पोस्ट पर बवाल क्यों खड़ा नहीं किया? जबकि हमने देखा कि एक लोकतांत्रिक देश में मुसलमानों को प्रोटेस्ट करने तक पर इसी मीडिया ने देशद्रोही बता दिया, तीसरा सवाल की देश में आतंक फैलाने वाले को मीडिया बदमाश क्यू बोल रही है अतंकवादी क्यों नहीं ? हालांकि ये पहली बार नहीं हो रहा, इससे पहले भी जब एक सख्स को आतंकवादियों के साथ कार में पकड़ा गया उसे अतंकवादी नहीं बोला गया, यहां तक कि मालेगांव बॉम्ब ब्लास्ट में शामिल सांसद को भी मीडिया अतंकवादी नहीं बोलती और भी बहुत से वाकयात है, आखिरी कुछ सवाल यह है कि क्या उर्दू नाम वाले ही आतंकवादी होते है, या कश्मीरियों के इंसाफ की बात करने वाला अतंकवादी होता है, अपने हक की आवाज़ उठाने वाले ही देशद्रोही होते है ? असल बात तो यह है कि वो हर इंसान अतंकवादी है जो  मुल्क में आतंक फेला रहा है और उसका कोई धर्म नहीं होता क्यूंकि धर्म को मानने वाले आतंक नहीं अमन चाहते है। पोस्ट पढ़ने के बाद ही उसकी कॉल आ गई हा भाई बोल क्यों कॉल कर रहा था कुछ नहीं ऐसे ही मैने यह कहते हुए उसके हाल चाल पूछे और फोन कट कर दिया क्यूंकि मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से उसके हौसले पस्त हो और वैसे भी गलत ही क्या लिखा था सब कुछ सच ही तो था यही तो हो रहा है देश में मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा है, दलितों के साथ बदसुलूकी की जा रही है, कश्मीर के भी हाल नाज़ुक है अल्लाह रहम करे। शीर्षक की वजह से कुछ लोगो ने उसकी पोस्ट को अपने फेसबुक ग्रुप कट्टर हिंदू ,  ब्राह्मण शेर , हिंदू एकता जैसे अन्य ग्रुप्स में शेयर करदी जिसके बाद उसकी पोस्ट पर लोग कॉमेंट्स में गाली - गलोच करने लगे उसे मारने कि धमकियां देने लगे , उसे पाकिस्तानी कहने लगे और भी बहुत कुछ इससे पहले भी इस तरह की कॉमेंट्स उसकी पोस्टों में देखने को मिलती रहती थी पर उसको कोई फ़र्क नहीं पड़ता था। शाम को उसकी कॉल आई आवाज़ में नमी के साथ उसने कहा भाई मुझे तुझसे अभी मिलना है मै उसकी आवाज़ सुन कर परेशान हो गया और " तू रुक मैं ही आ रहा हूं तेरे पास" कह कर उससे मिलने चला गया। उसके घर पहुंचने से पहले ही उसकी कॉल फिर से आ गई भाई कब आएगा अब में और परेशान हो गया और जितना जल्दी हो सका उसके घर पहुंचा मैने बाहर बैठी छोटी बहन से पूछा की असद कहा है उसने बताया वो कल से अपने कमरे में ही है मै तुरंत उसके कमरे में गया। असद इतना कहते ही वो मेरे गले लग गया। मैंने उसकी पीठ सहलाते हुए बोला भाई बात क्या है कुछ तो बता ऐसे मायूस मत हो। भाई मै अब कभी नहीं लिखूंगा असद ने बोला, पर क्यों ? मैने पूछा, तब उसने बताया कि पहले तो सिर्फ लोग मुझे ही गालियां देते थे धमकियां देते थे अब बात घर तक आ गई है। दो दिन से कई नंबरों से कॉल आ रहीं है वो मुझे मारने कि धमकियां देते है और अम्मी और बहन के लिए भी बहुत गलत बोलते है, मेरे तक तो ठीक था पर भाई में अपनी वजह से अपनी फैमिली को किसी तरह की मुसीबत में नहीं डालना चाहता कहते हुए असद ने अपनी बात ख़त्म कि। मुझे भी यही सही लगता है कह कर में वापस चला आया, पर अब भी मुझे उसकी फिकर हो रही थी इसलिए मैने उसे कॉल किया पर उसने रिसीव नहीं की चलो बाद में करूंगा और मैं फेसबुक पर उसकी प्रोफ़ाइल देखने लगा यह क्या उसने अपनी सारी पोस्ट डिलीट करदी अभी मैने यह देख ही रहा था कि रिफ्रेश करते ही "एकाउंट नोट फौंड" दिखाने लगा यह देख कर मै अब और भी ज्यादा परेशान हो गया मैने उसे फिर कॉल किया "देट नंबर यूं हेव डेल इट्स स्विच ऑफ प्लीज कॉल अगैन लेटर" अब क्या करूं घर भी नहीं जा सकता रात ज्यादा हो रही है, चलो सुबह का नाश्ता उसी के साथ करूंगा इंशाअल्लाह कहता हुआ मैं सो गया ।रिंग रिंग रिंग...... किसी की कॉल आ रही थी मैने घड़ी की तरफ देखा रात के 1:30 बज रहे थे, इतनी रात को कौन कॉल करेगा में बिस्तर से उठा देखा तो असद के घर वाले नंबर से कॉल आ रही थी मुझे घबराहट होने लगी, लड़खड़ाती आवाज़ में मैने बोला हेल्लो उधर से आवाज़ आई बेटा मैं असद का पापा बोल रहा हूं मैने सलाम(वासलामुआलैकुम) करते हुए पूछा जी बोलिए सब खेरीयत ? बेटा तुम्हारी असद से कोई बात हुई थी ? उसकी बहन ने बताया तुम घर आए थे कल शाम, "असद के पापा ने पूछा" हा अंकल हुई थी वो बहुत परेशान था मैंने मुक्तसर सी बातें बताने के बाद फिर पूछा पर अंकल हुआ क्या? बहुत देर तक कुछ ना बोलने पर उन्होंने बताया कि असद ने आत्महत्या करने की कोशिश की उसकी हालत बहुत गंभीर है हम फलां अस्पताल में है डॉक्टर ने कहा है बचने के उम्मीद नहीं है और तेज़ तेज रोने लगे, मेरे हाथ से भी फोन छूट गया और जार जार रोने लगा। मैंने सारा किस्सा अपनी अम्मी को बताया और रात को ही अस्पताल पहुंच गया। किसी को भी असद के पास जाने की इजाज़त नहीं थी। मैने बहुत इल्तिज़ा की मुझे एक बार मिलने दो पर उन्होंने मेरी एक ना सुनी। असद के पापा,अम्मी, मैं और उसके पड़ोसी सभी बाहर खड़े इंतजार कर रहे थे कि कब डॉक्टर साहब आ कर कहेंगे की अब आप असद से मिल सकते है। कुछ देर के बाद डॉक्टर साहब रूम  से बाहर आए उनके चेहरे से नाउम्मीदी साफ झलक रही थी जिसने दिल को और भी ज्यादा बेचैन कर दिया था, और असद के पापा के करीब जाकर डॉक्टर साहब ने आहिंस्ता से कहा हमने पूरी कोशिश की पर ज्यादा दैर तक गला घुटने की वजह से हम उसे बचा न सके, इतना सुनते ही असद कि अम्मी फुट फुट कर रोने लगी और उनकी आवाज़ पूरे अस्पताल में गूंजने लगी, मेरे आंसू भी रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। इस सबके दौरान ही असद को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया और सुबह फजर में उसकी मिट्टी भी लग गई। असद के पापा ने मेरी बताई हुई सारी बातों के आधार पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई आज पांच साल हो गए पुलिस इन्वेस्टिगेशन कर रही है पिछले कुछ सालों में बस इतना ही पता चला की जिन नंबरों से उसे कॉल्स आए थे वे सब चोरी के नंबर थे। 

नोट - साइबर बुलिंग दिन प्रति दिन बढ़ती ही जा रही है जिसका शिकार असद जैसे लोग होते है। साइबरय बुल्लिंग को अंज़ाम देने वाले लोग अपने खिलाफ बोलने वाले को इतना डराते - धमकाते है की वो इंसान जीने की उम्मीद ही छोड़ देता है।

#CyberBullying
#Islamophobia
#FreedomOfSpeech
#StopTargetingMuslims
#FacebookPost

Monday, 20 April 2020

ऑनलाइन शिक्षा कितनी जरूरी कितनी मजबूरी



हम जब भी किसी नए विचार को उपयोग में लाते है तब उसके दोनों ही पहलुओं को देखना बेहद जरूरी होता है।

                        ऑनलाइन शिक्षा



ऑनलाइन शिक्षा  एक बहुत ही अच्छा विचार है और ऐसी स्थिति में जब सभी कुछ लॉक डाउन है सभी लोग अपने घर में है। कॉलेज,स्कूल और अन्य संस्थाएं भी बंद है ऐसी स्थिति में ये एक बहुत ही अच्छे विकल्प के रूप में सामने आया है क्यूंकि इससे छात्र - छात्राओं को पढ़ने का एक अच्छा अवसर मिल रहा है जोकि बेहद लाभदायक है। यह समय भी परीक्षाओं का है लेकिन इस महामारी के चलते सभी परीक्षाओं को भी आगे बढ़ा दिया गया है उसके बावजूद भी छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है जिससे  भविष्य में होने वाली परीक्षाओं में  छात्रों को आसानी होगी। इस दृष्टि से ऑनलाइन शिक्षा इस स्थिति में अहम भूमिका निभा रही है।

परन्तु क्या सभी छात्र ऑनलाइन शिक्षा का लाभ उठा रहे है?

ऐसी स्थिति में जब लोगो के काम धंधे महीनों से ठप है घर में खाने के लिए कुछ नहीं है क्यूंकि हर वो छात्र जो कॉलेज,स्कूल और अन्य संस्थाओं में पढ़ रहा है जरूरी नहीं वो आर्थिक रूप से घर से मजबूत हो कई ऐसे छात्र है जो केवल हर महीने ही नेट का रिचार्ज कराते है जिसकी कॉस्ट कम से कम ₹199 है और ऐसी स्थिति में उनके लिए रिचार्ज करना बेहद मुश्किल है क्यूंकि ये कोई एक महीने की बात नहीं है कि कहीं से इंतजाम करले। दूसरी बात यह है कि देश के सभी क्षेत्रों में इंटरनेट की फास्ट सुविधा उपलब्ध नहीं है कई जगह ऐसी है जहा इंटरनेट की गति बहुत ही धीमी है तो कहीं इंटरनेट बिल्कुल भी नहीं चलता बस नाममात्र ही चलता है। ऐसे छात्रों के लिए जो इस तरह की समस्याओं से झूज रहे है उनके लिए तो ऑनलाइन शिक्षा का कोई मतलब ही नहीं है।

Thursday, 16 April 2020

इंटरनेट ने हिंदी के नए रास्ते खोल दिए है

जिस तरह से आज हम फेस बुक , ट्विटर, प्रतिलिपि, योर कोट, वेब पोर्टल और लिखने के अन्य एप्लीकेशंस पर हिंदी के लेख लिखने वालो की भारी भीड़ देख रहे है इससे साफ जाहिर हो रहा है कि इंटरनेट से हिंदी  भाषा को बढ़ावा मिला है।


इंटरनेट के माध्यम से अशिक्षित लोग भी अब आसानी से गूगल और यूं ट्यूब पर कोई भी जानकारी हिंदी भाषा में हासिल कर सकता है। आज हम देखते है की जो लोग हिंदी साहित्य पढ़ने का शौक रखते है पर किताबे ना मिलने की वजह से या फिर पेसो की किल्लत की वजह से किताबे नहीं खरीद पाते थे आज वह लोग इंटरनेट के माध्यम से किसी भी हिंदी साहत्यकारों की रचना को आसानी से  पीडीएफ फॉम में पढ़ सकते है।

जो लोग हिंदुस्तान के बाहर की खबरों को जानने में रुचि रखते है या किसी अंग्रेजी के लेखन को पढ़ना चाहते है पर अंग्रेजी भाषा का ज्ञान ना होने की वजह से पढ़ने में असमर्थ है आज वो इंटरनेट के माध्यम से अंग्रेजी को हिंदी भाषा में अनुवाद करके आसानी से पढ़ और समझ सकते है। जो लोग अखबार पढ़ना तो चाहते है पर हर रोज़ या महीने में अखबार डालने वाले को पैसे देने से बचते है अब वह भी इंटरनेट के जरिए आसानी से हिंदी भाषा के समाचार पढ़ सकते है।

हिंदुस्तान में आम बोल चाल की भाषा की बात करे तो कश्मीर में कश्मीरी, पंजाब में पंजाबी, हरियाणा में हरयाणवी, कर्नाटका में कन्नड़, केरल में मलयालम,  महाराष्ट्र में मराठी  तमिलनाडु में तमिल आदि भाषा बोली जाती है इसके बावजूद  हिंदी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है जिसको इंटरनेट ने और भी ज्यादा महत्व दिया है। हम किसी भी सर्च इंजन जैसे गूगल पर कोई भी जानकारी हासिल कर सकते है  बिना की बोर्ड का  इस्तमाल किए बस जो भी जानना हो  माइक पर बोल कर  जान सकते है।

इन सभी बातों को ध्यान में रख कर हम के सकते है कि इंटरनेट ने हिंदी के नए रास्ते खोल दिए है।

Sunday, 29 March 2020

वेब पोर्टल "नवभारटाइम्स डॉट कॉम" का विशलेषण

नाम      -  मौ  वाजिद अली
रोल न० -  2321/18
कोर्स     -  हिंदी  पत्रकारिता एवं जनसंचार
सब्जेक्ट -  न्यू मीडिया

किसी भी वेब पोर्टल का अध्ययन करने से पहले ये जान लेना आवश्यक है कि वेब पोर्टल किसे कहते है ?

 वेब साइटस के समूह को ही पोर्टल कहा जाता है। एक पोर्टल वास्तव में खुद भी एक साइट होता है जिससे दूसरी कई साइट्स को खोजा जा सकता है। इंटरनेट से जुड़ने पर हमें कई तरह के पोर्टल मिलते है। इन तमाम स्रोतों से जानकारी जुटाकर दी जाती है इसके साथ ही पोर्टल पर कई तरह की सेवाएं भी दी जाती है। जैसे:- कई पोर्टल यूज़र को सर्च इंजन की सुविधा देते है इसके अलावा कम्युनिटी चेट, फोरम, होम पेज और ईमेल। पोर्टल पर सर्च इंजन ,सब्जेक्ट डायरेक्ट्री और अन्य सर्विस जैसे:- न्यूज इंटरटेनमेंट, शिक्षा, स्टॉक, मार्केट,खेल आदि से जुड़ी खबर पढ़ सकते है। मोटे तौर पर वेब पोर्टल यूजर्स को बेसिक जानकारी देता है।

            "नवभरतटाइम्स डॉट कॉम" का विश्लेषण

नवभरतटाइम्स दिल्ली और मुंबई से प्रकाशित होने वाला एक दैनिक समचारपत्र है। इसकी स्थापना 1947 में हुई इसकी प्रकाशक कंपनी "बेनेट, कोलमैन" एवं कंपनी है। इसके संपादकों के नाम "रामकृपाल सिंह"(दिल्ली) और "सुंदरचंद ठाकुर"( मुंबई) है। इंटरनेट के इस दौर में समाचार पत्र लोग कम पढ़ते है इसलिए इसको भी ऑनलाइन होना पड़ा और नवभारतटाइम्स. कॉम की शुरुआत हुई।


नवभारतटाइम्स डॉट कॉम का विश्लेषण निम्नलिखित आधारो  पर किया जा सकता है।

•रूपरेखा
•भाषा
•कंटेंट
•खबर की तीव्रता
•सोर्स
•प्रस्तुतीकरण

>रूपरेखा
जब हम गूगल पर नवभारटाइम्स.कॉम को सर्च करते है उसके बाद हम देखते है कि NBT के LOGO के साथ स्क्रीन पर नोटिफिकेशन, लॉगइन, सर्च बार और एक आइकन होता है जिस पर क्लिक कर के आप अपनी मनपसंद रुचि की खबर पढ़ सकते है साथ है स्क्रीन पर सबसे पहले विज्ञापन देखने को मिलता है जो कि किसी भी पोर्टल की आय का स्रोत होता है।

जब हम साइड में दिए गए आइकन पर क्लिक करते है तो हमें कई सारे ऑप्शन देखने के लिए मिलते है जिसमें भारत,राज्य,दुनिया,राशिफल,खेल,मूवी,जोक्स,बिजनेस,एजुकेशन,यात्रा,टीवी, ऑटो,विचार,लाइफस्टाइल,अन्य,सिटिज़न, रिपोर्टर,एनबीटी, शोप,फोटो आदि होते है इनमें से किसी भी ऑप्शन पर क्लिक करने पर हम अपनी मनपसंद खबर को पढ़ सकते है

पोर्टल सबसे महत्वपूर्ण खबर को प्राथमिकता देता है ऐसी खबर जो ज्यादा चर्चा में हो साथ ही सभी के लिए सबसे महत्वपूर्ण हो और उस खबर की हेडलाइन के साथ साथ उसकी मोटी मोटी बातें भी स्क्रीन पर आप देख सकते है और उसी खबर से संबंधित खबरें भी होती है जिनकी संख्या आठ से दस होती है
कुछ खबरों के बाद हमें फिर से विज्ञापन देखने को मिलता है। विज्ञापन का काम किसी वस्तु का  प्रचार करना व जानकारी देना और शिक्षित करना होता है
देश विदेश की सभी खबरों के बाद देश, विदेश,हैल्थ और लाइफस्टाइल की खास खबरें एक अलग अंदाज़ में पेश की गई है सभी को सेक्शन वाइज विभाजित किया गया है और उनके साथ ही उनकी सभी खास खबरों को एक श्रंखला में रखा गया है जिनकी संख्या आठ से दस के बीच में होती है


नवभरतटाइम्स.कॉम अपने पोर्टल पर हमें वीडियो ऑडियो की भी सहूलियत देता है जिससे हम किसी भी खबर की वीडियो और ऑडियो दोनों देख और सुन सकते है जो कि पाठको को बहुत प्रभावित भी करता है साथ ही हम उन विडियोज को तुरंत उसी पोर्टल पर देख भी सकते है
जब हम किसी भी खबर को पढ़ने के लिए उस पर क्लिक करते है तो हम देखते है कि वहां हमें उस खबर के कुछ खास पॉइंट्स हाइलाइट्स करके दिखाए गए होते है साथ ही इस खबर को हम विस्तार से भी पढ़ सकते है उसमे भी हमें बीच बीच में विज्ञापन देखने के लिए मिलते रहते है




जब हम नवभारटाइम्स.कॉम वेब पोर्टल के आखिर तक पहुंचते है तो हम देखते है कि "खबरे एक झलक में" लिखा होता है जिसमें हमें कई विष्य देखने को मिलते है और साथ ही उसके नीचे वेब पोर्टल की सभी जानकारी भी मिलती है

>भाषा
नवभरतटाइम्स.कॉम की भाषा की बात करे तो हमे हिंदी भाषा के साथ - साथ अंग्रेजी भाषा के शब्द भी देखने को मिले जिसे हम हिंगलिश कहते है। इसकी भाषा सोशल मीडिया की भाषा से काफी हद तक प्रभावित लगती है तभी जिस हिंग्लिश को सोशल मीडिया ने अपनाया था आज उसी हिंग्लिश को हमे नवभरतटाइम्स.कॉम वेब पोर्टल पर देखने को मिलती है। साफ तौर पर हम के सकते है कि नवभरतटाइम्स.कॉम की भाषा शुद्ध हिंदी नहीं है। नवभरतटाइम्स.कॉम को हिंदी और इंग्लिश के साथ साथ पाठक कन्नड़,तमिल, मलयालम,तेलुगु,मराठी और बांग्ला में भी पढ़ सकते है।

>कंटेंट
कंटेंट के स्तर पर बात कि जाए तो नवभारटाइम्स.कॉम हर खबर को सही ढंग से प्रस्तुत करता है। हर खबर को पूरे विस्तार के साथ आसान भाषा में बताया जाता है किसी  भी समाचार स्रोत के लिए जरूरी है कि वह खबरों को सही ढंग से प्रस्तुत करे उसमे किसी भी प्रकार की कोई अधूरी बात न हो।

नवभरतटाइम्स.कॉम को स्पष्ट ढंग से प्रस्तुत करता है अगर कोई खबर फॉलोअप कि जा रही है तो उस खबर को फिर से बताया जाता है। एक खबर में जितने गुण होने चाहिए वो सब नवभरतटाइम्स.कॉम में होते है। नवभरतटाइम्स.कॉम निष्पक्ष रूप से संतुलित प्रकार से खबर को प्रसारित करता है। खबर का संतुलन किसी भी समाचार पोर्टल के लिए बेहद जरूरी होता है और हम कह सकते है कि नवभरतटाइम्स.कॉम में संतुलित खबरे पढ़ने के लिए मिलती है। हालांकि हर वेबपोर्टल का एजेंडा सेटिंग होती है इस पोर्टल में भी खबरों मै एजेंडा सेटिंग की गुंजाइश पाई जा सकती है पर इसकी संख्या कम ही है ज्यादातर निष्पक्ष खबरे ही पढ़ने के लिए मिलती है।

>खबर की तीव्रता
खबर को जल्दी से जल्दी पाठको तक पहुंचाने के लिए नवभरतटाइम्स.कॉम काबिले तारीफ़ है। इसमें आपको दुनिया भर कि हर तरह की खबरें मिलेंगी। नवभारतटाइम्स.कॉम में सबसे ऊपर रोज़ बड़ी खबरे होती है। इससे अंदाजा लगा सकते है कि यह पोर्टल खबरों को कितनी तीव्रता से पाठको तक पहुंचाते है। आज जबकि हर चीज ऑनलाइन है इतने सारे वेब पोर्टल , यूट्यूब चैनल, वेबसाइट्स खुल गईं है जहां आज हर दूसरा व्यक्ति वेब पोर्टल का निर्माण कर रहा है। वहीं एक ऑनलाइन खबर पहुंचाने वाले माध्यम के रूप में नवभारटाइम्स.कॉम की तारीफ की का सकती है क्यूंकि वह जल्दी से जल्दी खबरों को अपने पाठको तक पहुंचाने में सक्षम है।

>सोर्स
सूत्रों के हवाले से कह देने भर से खबर नहीं दी जा सकती है इसलिए एक पत्रकार के सोर्स अच्छे होने चाहिए। नवभारटाइम्स.कॉम की बात की जाए तो इसमें ऑथेंटिक सोर्स की खबरें ही आती है। कहा जा सकता है की नवभारतटाइम्स.कॉम में अाई खबर को सही मानकर हम उस पर यकीन कर सकते है।

नवभारटाइम्स.कॉम में खबरे भाषा, पी टी आई, यू एन आई तथा अन्य जानीमानी न्यूज एगेंसी से संवाददाताओं से वैधानिक सूत्रों से आती है। सोर्स किसी भी खबर के लिए किसी भी न्यूज चैनल के लिए किसी भी वेबसाइट्स के लिए बहुत जरूरी है।

>प्रस्तुतीकरण
 खबरों का प्रस्तुतीकरण सही ढंग से करना बेहद जरूरी है। यदि बात करें नवभरतटाइम्स.कॉम की तो इसमें खबर को प्रस्तुत करने का अंदाज़ बेहद खूबसूरत है। इसमें सबसे पहले आपको एक शीर्षक मिलेगा उसके बाद नीचे खबर से सम्बन्धित तस्वीर दिखाई जाएगी और फिर खबर के विशेष बातें हाइलाइट्स करके दिखाई जाती है जिससे पाठक कम समय होने पर किसी भी खबर की मोटी मोटी बाते जाना सके उसके बाद पूरी खबर को विस्तार से दिया जाता है।साथ ही जिन खबरों कि वीडियो भी है उन्हें पाठक उसी स्क्रीन पर तुरंत देख सकते है जो कि पाठको की रोचकता को बढ़ाता है।

>निष्कर्ष
आज के इंटरनेट के इस दौर में हर समाचार पत्र डिजिटल हो रहे है। उन्हीं की होड़ में नवभारटाइम्स ने भी नवभरतटाइम्स.कॉम की शुरुआत की। जो कि आज काफी बेहतरीन काम भी कर रहा है और अगर देखा जाए तो इसकी भाषा, कंटेंट, सोर्स और प्रतुतिकरण एक दम लाजवाब है और साथ ही ये किसी भी खबर को अपने पाठको तक आसान शब्दों में तीव्रता से पहुंचाने का काम भी कर रहा है।

Tuesday, 28 January 2020

सोशल मीडिया से न्यू मीडिया


जैसे जैसे दुनिया में टेक्नोलॉजी का विस्तार हो रहा है वैसे वैसे ही लोगो का ध्यान टेलीविजन एवं रेडियो से हट कर सोशल मीडिया ट्विटर,फेसबुक,इंस्टाग्राम,वाट्सअप,ब्लॉग और यू ट्यूब  की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। जिसे हम  न्यू मीडिया के रूप में देख रहे है। जहां अब प्रकाशित सामग्री समाचार पत्रो, पत्रिकाए,किताबो आदि की जगह  इस न्यू मीडिया ने ली है वहीं दूसरी ओर प्रसारण कार्यकर्मों के लिए भी यह एक अच्छे विकल्प के रूप में उभर कर सामने आया है जो कि काफी लोकप्रिय भी है।  न्यू मीडिया सभी वर्ग के लोगों के लिए बेहद आसान और समझने योग्य तो है ही साथ ही समय कि बचत के लिए भी अच्छा साधन है। दुनिया भर में इसका बोलबाला है सभी न्यूज चैनलों, न्यूज एजेंसी और न्यूज पेपर्स ने भी अपनी न्यूजेस एवं मुख्य सूचनाएं इसी के माध्यम से लोगो तक पहुंचना शुरू कर दिया है साथ ही ट्विटर को समाचार संकलन का जरिया भी बना लिया है। दुनिया भर में सभी वर्ग के लोगों के पास एंड्रॉयड फोन है और जब से न्यू मीडिया का प्रचलन बड़ा है इसकी बिक्री में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे है। इसके माध्यम से किसी भी खबर को जल्द से जल्द दुनिया के कोने कोने तक पहुंचाया जा रहा है जो की हम सभी के लिए बहुत लाभदायक है। 


मोहम्मद वाजिद अली