Friday, 1 November 2019

मजबूरियां

#एक_बार_जरूर_पढ़े

ये खिलखिलाता चेहरा अपनी बेबसी को छुपा रहा है



 आप सभी सोच रहे होंगे यह कौन है? अभी थोड़ी देर पहले ही लगभग 12:15 बजे में यमुना विहार से अपने घर के लिए आ रहा था  मैने रास्ते में ही खाना खाया था और खाना खाने के बाद बचा हुआ एक पॉलिथीन में बंद कर गाड़ी पर बांध लिया और जैसे ही में रोड से गुजर रहा था वहीं रास्ते में एक कूड़ाघर था मैने वो   पॉलिथीन  उसमे फेंकने के लिए गाड़ी रोकी और वो पॉलिथीन वहां फेंक दी मैने अभी गाड़ी आगे बढ़ाई भी नहीं थी कि एक  बच्चा महज 10_12 साल की उम्र होगी उसकी मेरी फेंकी हुई पॉलीथिन को उठाने लगा मैने तुरंत उसको रोका अरे ये क्या कर रहा है भाई और उसे अपने पास बुलाया वो मुझसे कुछ बोल नहीं रहा था फिर मेरे पूछने पर उसने बताया कि उसके मा बाप नहीं है और घर(जहां भी वो रहता होगा)  पर उसकी छोटी बहन उसका इंतज़ार कर रही है जिससे वो यह कहकर आया था कि मैं तेरे लिए खाना लेने जा रहा हूं। उसकी इतनी बात सुन कर दिल कांप उठा कि एक छोटा सा बच्चा जो कि यतीम है  इतनी रात को कुड़ेघर में खाना ढूंढ़ रहा है। मै उसकी जैसे  मदद कर सकता था उस वक़्त मैने की और जब जाने लगा मैने उसे आवाज़ दी और वापस अपने पास बुलाया और उसकी ये बेहद खूबसरत तस्वीर ली जिसमें उसकी यह मुस्कुराहट बयां कर रही थी कि वो बहुत खुश था और  उसकी इस मुस्कुराहट ने मुझे वो सुकून दिया जो की में अपने शब्दों से बयां नहीं कर सकता।

मकसद ये कहानी सुना ना नहीं था बल्कि आप लोगो तक मेरा ये छोटा सा मैसेज पहुंचना था कि हम लोग रोजाना ना जाने कितना खाना बरबाद कर देते है फिर वो चाहे किसी के बैर्थडे पार्टी में एक दूसरे के मुंह पर केक लगा कर करते हो या फिर जब खाते खाते मन भर जाने पर उसे कूड़े में फेंक देते है क्यों ना हम अपना बर्थडे ऐसे ही बच्चो के साथ मिलकर मनाना शुरू कर दे इससे आप इन लोगो को खुशियों की वजह बन सकते हो साथ ही जब कभी आप बाहर कहीं खाना खाए तो एक नजर अपने आस पास देखले कि कहीं कोई इस तरह का बच्चा भूका तो नहीं है ताकि आपके खाने का थोड़ा सा हिस्सा किसी कि खुशियों की वजह बन सकती है।

पढ़ने  लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ❤

#वाजिद✍️

Sunday, 26 May 2019

असुरक्षित बचपन

हमारे समाज में कुछ लोग  इस कदर दरिंदगी पर उतर आए है की उनके  लिए मासूमियत जैसा कोई  शब्द है ही नहीं इसलिए मासूमों के साथ कुकर्म और उनकी हत्या करने में उन्हें किसी भी तरह का कोई भय नहीं होता है। देश मेंं दरिंदगी का आलम यह है कि महज़ 3 साल की उम्र में देश की बेटियाँ इन दरिंदों का शिकार हो जाती हैं छोटे-छोटे बच्चों के ऐसी वारदातें  रोज़ाना सुनने को मिलती है इसके बावजूद इन पर कोई रोक नहीं है ना ही इसको लेकर देश की सरकार किसी तरह का कोई भी कदम उठा रही है।
ऐसी स्थिति में सभी लोगों को सक्रिय रहने की आवश्यकता है बच्चों की सुरक्षा और निगरानी को पहला स्थान दें किसी भी व्यक्ति पर विश्वास न करें क्योंकि इन वारदातों के पीछे अक्सर करीबी लोगों का ही हाथ होता है। बच्चों को भी इसके प्रति जागरूक करें। इससे बचने और निडर बनने की शिक्षा दें क्योंकि अक्सर बच्चे भय के कारण भी उत्पीड़न का शिकार होते है।

मौ. वाजिद अली

Saturday, 25 May 2019

नकारात्मकता सें बचाव

इस साल के 12वी के परिणाम को देखते हुए बहुत सारे छात्र व छात्राओं के मन मे निराशा बनी हुई है अपने भविष्य को लेकर जिसकी वजह से वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित है और नकारात्मक स्थिती के शिकार हो रहे है जो कि उनके लिए ठीक नही है। कई जगहों से खबरें भी सुनने को मिलती है की बच्चे कम  नंबरों की वजह से  इतना नकारात्मकता का शिकार हो जाते है कि वो आत्महत्या जैसे बड़े कदम तक उठाने की सोचने लगते है और कुछ इसे अंजाम भी दे देते है।
ऐसी स्थिति में चाहिए कि ऐसे बच्चो से अच्छा स्वभाव बनाये रखे और उनको किसी भी तरह से उनके नंबरों को लेकर उनसे चर्चा ना करें। ऐसे छात्र व छात्राओं के परिवार और दोस्तो को चाहिए कि उनको किसी भी तरह से इस स्थिति से निकलने की कोशिश करे उनका ध्यान कहीं औऱ केंद्रित करने का प्रयास करें उनको भविष्य में कुछ और व अन्य रास्ता चुनने की सलाह दे उन्हें अकेला न छोड़ें उनकी मनोस्थिति को जानने की कोशिश करें।

मौ. वाजिद अली

Sunday, 28 April 2019

भारत मे कुपोषण

सरकार के अनेक प्रयासो के बाद भी आज देश मे लोग भूख और कुपोषण की समस्या से  लड़ रहे है। 2017 में इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा जारी वैश्विक भूख सूचकांक में दुनिया के 119 विकासशील देशो में भारत का स्थान 100 था जो कि 2016 में 97 था इससे पता चलता है की देश में भूख और कुपोषण को लेकर हालात सुधरने के बजाए बिगड़े है। भारत में कुपोषण और खाद्य सुरक्षा को लेकर कई योजनाएं चलाई जाती रही हैं लेकिन समस्या की विकरालता को देखते हुए इतना सब कुछ कम तो नहीं था साथ ही व्यवस्थागत विसंगतियों और भ्रष्टाचार की वजह से भी ये लगभग बेअसर साबित हुई। अभी भी देश के राज्यो में लगभग 43 लाख बच्चे कुपोषित है जबकि करीब 10 लाख बच्चे तो अतिकुपोषित यानी मौत की दहलीज पर है जिसका मतलब है कि यदि समय रहते इनके स्वास्थ्य पर ध्यान नही दिया गया तो यह जल्दी ही दम तोड़ देंगे। भारत सरकार को एक नजर इन कुपोषण से पीड़ितों की ओर भी देखना अतिआवश्यक है सिर्फ दिलहासा देने से कुछ नही होगा।

Thursday, 25 April 2019

बाल मजदूरी के खिलाफ

बाल मजदूरी भारत देश के लिए एक निराशाजनक तस्वीर है क्योंकि जिस देश मे "सबका साथ सबका विकास" जैसे श्लोकों से लोगों को प्रभावित किया जाता हैं उनको दिलहासा दिया जाता है। उसी देश में एक ऐसा समाज भी है  जो बच्चों को पढ़ने लिखने उनके भविष्य को बेहतर बनाने कि जगह उन्हें आग कि भट्टियों में झोंक देते है जिस उमर में बच्चों के नरम होने चाहिए उनके हाथ आग से जले हुए है उन मासूम बच्चों का भविष्य उस आग की लपटों में ही जल कर राख बन जाता है। ऐसी मानसिकता वाले समाज को जल्द से जल्द नष्ट करने की आवश्यकता है जिस देश को पूरे विश्व से प्रोत्साहन मिल रहा है उसके विकास की नीतियों के लिये उसी देश के लिए बाल मजदूरी एक कलंक है। संविधान में भी इस पर प्रतिबंध है इसके लिए भारत सरकार ने कई  योजनाएं भी चलाई पर फिर भी इस  पर पूर्ण रूप से रोक लगाने में असमर्थ रहे। भारत सरकार को इस विषय को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है जिससे किसी भी बच्चे का भविष्य आग की भट्टी में राख ना हो।

बेटियों को सशक्त बनाओ

पिछले कई दशको से देश की बेटियों का  शिक्षा का स्तर काफी हद तक बढ़ा है जो कि बहुत ही गर्व की बात है।लेकिन वहीं एक तरफ देश की बेटियों के साथ दुव्र्यवहार की वारदातों मे भी वृद्धि हुई है। "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" जैसे श्लोक से बेटियां पढ़ तो रही है लेकिन वह खुद को बचाने मे असमर्थ रह जाती है जिसका फायदा वह लोग उठा रहे है जो बेटियों के साथ दुव्र्यवहार करते है । इसलिए देश की बेटियों को दुव्र्यवहार से बचाने के लिए शिक्षा  के साथ साथ उन्हें सशक्त बनाने की भी आवश्यकता है। जिससे वह अपने साथ हो रहे दुव्र्यवहार का विरोध कर सकें खुद की रक्षा कर सकें। देश की बेटियों का सशक्त होना उनके शिक्षित होने से भी ज्यादा आवश्यक है क्योंकि शिक्षा से वह शिक्षित और कुशल तो हो सकती हैं परंतु किसी भी समस्या से लड़ने के लिए उनका सशक्त होना अति आवश्यक हैं। इसलिए बेटियों को सशक्त बनाओ।