हमारे समाज में कुछ लोग इस कदर दरिंदगी पर उतर आए है की उनके लिए मासूमियत जैसा कोई शब्द है ही नहीं इसलिए मासूमों के साथ कुकर्म और उनकी हत्या करने में उन्हें किसी भी तरह का कोई भय नहीं होता है। देश मेंं दरिंदगी का आलम यह है कि महज़ 3 साल की उम्र में देश की बेटियाँ इन दरिंदों का शिकार हो जाती हैं छोटे-छोटे बच्चों के ऐसी वारदातें रोज़ाना सुनने को मिलती है इसके बावजूद इन पर कोई रोक नहीं है ना ही इसको लेकर देश की सरकार किसी तरह का कोई भी कदम उठा रही है।
ऐसी स्थिति में सभी लोगों को सक्रिय रहने की आवश्यकता है बच्चों की सुरक्षा और निगरानी को पहला स्थान दें किसी भी व्यक्ति पर विश्वास न करें क्योंकि इन वारदातों के पीछे अक्सर करीबी लोगों का ही हाथ होता है। बच्चों को भी इसके प्रति जागरूक करें। इससे बचने और निडर बनने की शिक्षा दें क्योंकि अक्सर बच्चे भय के कारण भी उत्पीड़न का शिकार होते है।
मौ. वाजिद अली
ऐसी स्थिति में सभी लोगों को सक्रिय रहने की आवश्यकता है बच्चों की सुरक्षा और निगरानी को पहला स्थान दें किसी भी व्यक्ति पर विश्वास न करें क्योंकि इन वारदातों के पीछे अक्सर करीबी लोगों का ही हाथ होता है। बच्चों को भी इसके प्रति जागरूक करें। इससे बचने और निडर बनने की शिक्षा दें क्योंकि अक्सर बच्चे भय के कारण भी उत्पीड़न का शिकार होते है।
मौ. वाजिद अली

