Sunday, 26 May 2019

असुरक्षित बचपन

हमारे समाज में कुछ लोग  इस कदर दरिंदगी पर उतर आए है की उनके  लिए मासूमियत जैसा कोई  शब्द है ही नहीं इसलिए मासूमों के साथ कुकर्म और उनकी हत्या करने में उन्हें किसी भी तरह का कोई भय नहीं होता है। देश मेंं दरिंदगी का आलम यह है कि महज़ 3 साल की उम्र में देश की बेटियाँ इन दरिंदों का शिकार हो जाती हैं छोटे-छोटे बच्चों के ऐसी वारदातें  रोज़ाना सुनने को मिलती है इसके बावजूद इन पर कोई रोक नहीं है ना ही इसको लेकर देश की सरकार किसी तरह का कोई भी कदम उठा रही है।
ऐसी स्थिति में सभी लोगों को सक्रिय रहने की आवश्यकता है बच्चों की सुरक्षा और निगरानी को पहला स्थान दें किसी भी व्यक्ति पर विश्वास न करें क्योंकि इन वारदातों के पीछे अक्सर करीबी लोगों का ही हाथ होता है। बच्चों को भी इसके प्रति जागरूक करें। इससे बचने और निडर बनने की शिक्षा दें क्योंकि अक्सर बच्चे भय के कारण भी उत्पीड़न का शिकार होते है।

मौ. वाजिद अली

Saturday, 25 May 2019

नकारात्मकता सें बचाव

इस साल के 12वी के परिणाम को देखते हुए बहुत सारे छात्र व छात्राओं के मन मे निराशा बनी हुई है अपने भविष्य को लेकर जिसकी वजह से वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित है और नकारात्मक स्थिती के शिकार हो रहे है जो कि उनके लिए ठीक नही है। कई जगहों से खबरें भी सुनने को मिलती है की बच्चे कम  नंबरों की वजह से  इतना नकारात्मकता का शिकार हो जाते है कि वो आत्महत्या जैसे बड़े कदम तक उठाने की सोचने लगते है और कुछ इसे अंजाम भी दे देते है।
ऐसी स्थिति में चाहिए कि ऐसे बच्चो से अच्छा स्वभाव बनाये रखे और उनको किसी भी तरह से उनके नंबरों को लेकर उनसे चर्चा ना करें। ऐसे छात्र व छात्राओं के परिवार और दोस्तो को चाहिए कि उनको किसी भी तरह से इस स्थिति से निकलने की कोशिश करे उनका ध्यान कहीं औऱ केंद्रित करने का प्रयास करें उनको भविष्य में कुछ और व अन्य रास्ता चुनने की सलाह दे उन्हें अकेला न छोड़ें उनकी मनोस्थिति को जानने की कोशिश करें।

मौ. वाजिद अली